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Sunday 19 July 2009

रचना जी द्वारा भेजी गई लिंक और आशीष जी के शब्दों के साथ बधाई माँगनी चाहिए क्या?

तकरीबन एक घंटा पहले नारी ब्लॉग की सूत्रधार रचना सिंह द्वारा एक लिंक भेजी गई मुझे। हालांकि इस घटना क्रम से परिचित तो था किन्तु कुछ संशय अभी भी है। इस बार मैंने सोचा कि इसे ब्लॉग-जाहिर किया ही जाये। अब अपने शब्द क्या लिखूँ जब आशीष खंडेलवाल जी ने काफी कुछ लिख दिया है ऐसे ही एक और घटनाक्रम में। इसलिए आशीष जी के लिखे शब्दों और स्टाईल की नकल (क्षमायाचना सहित), अपनी सुविधा के हिसाब से परिवर्तित की हुई, रचना जी द्वारा दी गई लिंक के साथ

कौन कहता है कि ऑस्ट्रेलिया में हम हिंदुस्तानियों के खिलाफ़ नस्लभेद हो रहा है? प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा ब्लॉग को तो वहां ऐसा दर्जा दिया जा रहा है, जैसा कभी हिंदुस्तान में भी नहीं मिला। वहां के एक विश्वविद्यालय ने प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा को अपनी ई-लर्निंग स्टाफ लिस्ट में शुमार बताया है। यहां इस ब्लॉग का केवल नाम ही नहीं है, बल्कि पूरा का पूरा ब्लॉग फ्रेम के रूप में मौजूद है। यह यूनिवर्सिटी है- आस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह वहां की बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी है और सरकारी अनुदान पर चलती है। देखिए इसकी वेबसाइट पर प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा कहां और कैसे मौजूद है।



अब यह मत पूछिए कि यह ब्लॉग वहां तक कैसे पहुंचा और पूरा का पूरा फ्रेम वहां कैसे दिखने लगा। इस सवाल को पूछने से आपको इसलिए रोक रहा हूं कि इसका जवाब तो मुझे भी नहीं पता। खैर हमें तो आम खाने से मतलब, पेड़ क्यों गिने। आप बधाई दे ही दो।











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20 टिप्पणियाँ:

सतीश पंचम July 19, 2009 1:55 PM  

पाबला जी, सच्चे मन से किये गये प्रयास सराहे ही जायेंगे।
बहुत बहुत बधाई।

सैयद | Syed July 19, 2009 2:02 PM  

पाबला जी, बहुत बहुत बधाई !

अविनाश वाचस्पति July 19, 2009 2:08 PM  

चलिए मिलकर सचमुच में
आम खाते हैं और
गुठली को जमीन में
दबाते हैं
फिर पौधा बनेगा
पौधा पेड़ बना तो ठीक
नहीं बना तो भी ठीक
नहीं बना तो
उसकी गुठली निकाल कर
पीपनी बजायेंगे


पेड़ बना तो
फिर आम खायेंगे
फिर दोबारा गुठली ...

बधाईयां
आम की तरह मीठी रसीली।

संगीता पुरी July 19, 2009 2:47 PM  

हां , बधाई तो मिलनी ही चाहिए !!

Vivek Rastogi July 19, 2009 3:03 PM  

कर्म किये जाइये फ़ल की इच्छा मत करिये वो तो पककर अपने आप ही आपको मिल जायेगा।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi July 19, 2009 3:34 PM  

बहुत बहुत बधाइयाँ!

Udan Tashtari July 19, 2009 4:01 PM  

बहुत बहुत बधाई ..

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey July 19, 2009 5:31 PM  

रोचक है यह!

वन्दना अवस्थी दुबे July 19, 2009 5:34 PM  

बहुत-बहुत मुबारक हो...

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" July 19, 2009 5:53 PM  

पाबला जी, हमारा ब्लाग(ज्योतिष की सार्थकता)भी है उस साईट पर। अब हमें भी बधाई माँग लेनी चाहिए क्या?

काजल कुमार Kajal Kumar July 19, 2009 7:38 PM  

लो जी, आपको तो बधाई हो ही. अपना पेज भी वहां लिस्टिड हुआ मिला..
http://copyscape.com/view.php?o=41174&u=http://my.acu.edu.au/apps/staff_dir/department_list2%3Fsq_content_src%3D%252BdXJsPWh0dHAlM0ElMkYlMkZrYWphbGt1bWFyY2FydG9vbnMuYmxvZ3Nwb3QuY29tJTJGMjAwOSUyRjA3JTJGei5odG1sJmFsbD0x&t=1248012137&s=http://kajalkumarcartoons.blogspot.com/&w=45&c=&i=1&r=8
बल्ले बल्ले...

हिमांशु । Himanshu July 19, 2009 7:58 PM  

बधाई आपको भी और उन सबको भी जिनके चिट्ठे वहाँ दिख रहे हैं ।

हिमांशु । Himanshu July 19, 2009 8:09 PM  

अरे ! मैं भी हूँ वहाँ - देखें - http://copyscape.com/view.php?o=42753&u=http%3A%2F%2Fmy.acu.edu.au%2Fapps%2Fstaff_dir%2Fdepartment_list2%3Fsq_content_src%3D%252BdXJsPWh0dHAlM0ElMkYlMkZyYW15YW50YXIuYmxvZ3Nwb3QuY29tJTJGMjAwOSUyRjA0JTJGYmxvZy1wb3N0XzI4Lmh0bWwmYWxsPTE%253D&t=1248014176&s=http%3A%2F%2Framyantar.blogspot.com&w=18&c=&i=1&r=3

Shefali Pande July 19, 2009 8:29 PM  

बहुत बहुत बधाई।

काजल कुमार Kajal Kumar July 19, 2009 8:48 PM  

एक बात और पाबला जी,
सोफिस्टीकेटिड काम करने के बाद मैंने एक देसी काम किया...
अपने ब्लाग का पता बस यूं ही मज़े लेने के लिए गूगल के सर्च इंजन में डाल कर एंटर दबा दिया...
और ये क्या...मैं तो हैरान ही रह गया ये जानकर कि मेरा ब्लागपेज कहां कहां लिस्ट हो रहा है...
शायद इसीलिए ज्ञानी लोग कह गए हैं कि अंतरिक्ष की संभावनाएं अनंत हैं...उन्हें क्या पता था कि इंटरनेट की भी यही हालत होगी...

tahseeldar July 19, 2009 8:49 PM  

एक बार रेलगाड़ियों के आने-जाने वाला लेख आपने डाला था, उसका लिंक मुझसे गायब हो गया है। वो कहां और कैसे मिलेगा, बड़े काम का था जी।

बी एस पाबला July 19, 2009 9:41 PM  

तहसीलदार जी, ये अच्छी बात नहीं है जो अपना प्रोफाईल छुपाए फिर रहे :-)

वैसे रेलगाड़ी वाला लेख पसंद आया, यह जान कर प्रसन्नता हुयी।

इस 'भारत की कौन सी रेलगाड़ी किस स्टेशन पर है, एक क्लिक में पता लगाएं' वाले लेख के लिए यहाँ क्लिक करें

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari July 19, 2009 10:15 PM  

बधाई हो....

डा० अमर कुमार July 20, 2009 2:27 AM  


हौ प्राजी, साड्डा पेज़ वी उत्थों मज़ूद ऎ जी ! लिंकानूँ वेक्खो

" डा - - myACU
... बिसूरता बुद्धू बक्सा खिल पड़ा, बोला आजा मेरे ... हम फड़फड़ाये मूँ बिराये बजट्ट अली. ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली ममता ना बरसा पाया तू बजट्ट ... रहस्यकम तात.. सूक्ष्मातिक्षूम रहस्यकम ! ... पहिले निट्ठल्ला फोटुओं का इन्ट्राडेक्सन देगा ... कलक्टरगँज से बेनाझाबर.. हईयन हईयन हईयन रिक्शा ... आज खोलि रहे हैं,एक्लूसिवली आन निट्ठल्ला ! ... हमारे दिमगिया को पुचकारा , “ देख ले भाई. ... और, यह तो तुम्हरे कम्प्यूटर में समा के ... . अपुन को ऎंवेंईं .. सिनेमाई चलित्तर में ... . दिल की ही सुनवायेंगे ! तो, सुनिये.. वर्ड काउँट 2509 ... . मूल परिकल्पना web2feel.ब्लागर ... हैक ब्लागर ट्रिक्स एवँ मिलैनो | स्वत्व ...
http://my.acu.edu.au/apps/staff_dir/ department_list2?sq_content_src=%2BdXJsPWh0dHAlM0ElMkYlMkZiaW5hdmFqYWguYmxvZ3Nwb 3QuY29tJTJGJmFsbD0x
हाहा ही ही.. बजट्ट अली बजट्ट अली, हो ...
... बिसूरता बुद्धू बक्सा खिल पड़ा, बोला आजा मेरे कोल आ साड्डे नाल मनों अतिरँजन है, है मामला ... अखिल भारतीय फ़िनेन्स मेनेस्टर प्रोणोब दा ने दू मीनिट में शोबका चिरीआ उरा दीया ... हम फड़फड़ाये मूँ बिराये बजट्ट अली. ऑय बजट्ट अली बजट्ट अली ममता ना बरसा पाया तू बजट्ट ... रहस्यकम तात.. सूक्ष्मातिक्षूम रहस्यकम ! और यह भी कि, जनता अब पानी पीकर गुज़ारा करने पर ...
http://my.acu.edu.au/apps/staff_dir/ department_list2?sq_content_src=%2BdXJsPWh0dHAlM0ElMkYlMkZmZWVkcHJveHkuZ29vZ2xlL mNvbSUyRiU3RXIlMkZiaW5hdmFqYWglMkYlN0UzJTJGUXdvZUZUQ01DSE0lMkZibG9nLXBvc3QuaHRtb CZhbGw9MQ%3D%3D "

पाबला साहब, यह इसलिये ही सँभव हो पा रहा है, क्योंकि उनके हुँआँ मतलब लैब में... रिवर्स आई.पी. पर काम चल रहा है.. और यह पेज़कापी की तकनीक की प्रयोगशाला है, कैथोलिक या जो भी नाम हो फ़र्क़ नहीं क्योंकि यह डमी नाम है, जो सँभवतः इसके प्रायोजक डो्मेनटूल्स ने दिया होगा ! अपुन भी आपके दरबार में " हुँआँ हुँआँ " कर देवें !

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) July 20, 2009 9:49 AM  

बहुत-बहुत बधाई पाबला जी :)


वैसे मेरे शब्दों को अगर आप नीचे वाले अनुच्छेद तक उठा कर लाते, तो यह बधाई और भी सार्थक होती, व्यंग्य का मकसद एकदम स्पष्ट होता। अधूरी बात ने तो अर्थ का अनर्थ कर दिया है..

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