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Sunday 8 November 2009

भिलाई में फिर जमी ब्लॉगरों की महफिल: एक नए ब्लॉगर के साथ

नाईट शिफ्ट से आ कर दोपहर की नींद का मज़ा ही कुछ और है। उस दिन दोपहर के भोजन बाद धूप में कुछ देर आराम से बैठा ही था कि खुमारी छाने लगी। हवा में ठंडक तो थी ही। मोबाईल को वाईब्रेशन में रख लम्बी तान सो गया। आँखें खुली तो 5 बज चुके थे। हाथ में मोबाईल आते ही नज़र डाली तो संजीव तिवारी, शरद कोकास की साढ़े तीन बजे के आसपास की मिस्ड कॉल दिखीं। शरद जी ने उलाहना दिया कि कब से आपको कॉल कर रहे हैं। मैंने वस्तुस्थिति बताई उन्हें।

जब उन्होंने बताया कि ललित शर्मा आए हुए हैं रायपुर से, तो मुझे ध्यान आया कि एक दिन पहले शर्मा जी ने सम्भावना व्यक्त की थी भिलाई आने की। मैंने शरद जी से पौन घंटे की मोहलत ली और पहुँच गया सुपेला के हिमालय हॉटल के रेस्टोरेन्ट में। सामने ही एक अपरिचित चेहरे के साथ बैठे दिखे शरद कोकास, संजीव तिवारी, ललित शर्मा। शरद जी ने परिचय करवाया 'ये हैं स्टेट बैंक में कार्यरत् बालकृष्ण अय्यर, मेरे सहकर्मी, अनिल पुसदकर के सहपाठी और अब हम सबके साथी ब्लॉगर'

बालकृष्ण अय्यर रायपुर में कार्यरत् थे। हाल ही में वे भिलाई स्थानांतरित हुए और आते ही शरद जी ने उनका ब्लॉग बनवा दिया। बालकृष्ण जी का रूझान रंगकर्म की ओर भी है और वह इस शौक को शिद्दत से पूरा भी करते हैं।

ललित शर्मा दोपहर से ही आए हुए थे और अब लौटने को तत्पर थे। लेकिन बातों का दौर चला तो रात के 8 बज गए। अजय कुमार झा व अनिल पुसदकर के बीच एक टिप्पणी को ले कर पनपी गलतफहमी से शुरू हुई बात इस बात पर आ कर ठहर गई कि जब तक दो ब्लॉगरों के मध्य आपसी संवाद नहीं होगा तब तक ऐसी नौबत आने की संभावना बनती रहेगी। बहुमत इसी बात का था कि आपसी संवाद बढ़ाया जाए

इसी मुद्दे पर बात जब आगे बढ़ी तो टलते आ रहे ब्लॉगर सम्मेलन की रूपरेखा भी बनने लगी। संभावित समय, पाश्चात्य नव वर्ष का निश्चित किया गया। आयोजन स्थल, रायपुर की बजाए भिलाई में ही रखे जाने हेतु विमर्श हुया।


बालकृष्ण अय्यर व अनिल पुसदकर के साथ स्कूल की मज़ेदार बातों के बीच शरद जी एक अच्छा कैमरा खरीदने की चाहत कर बैठे। विभिन्न जानकारियाँ दे कर बालकृष्ण जी ने उनकी चाह्त को पंख लगा दिए। किसी बात पर दोनों के बीच जो नोक-झोंक हुई वह देखते ही बनती थी।

इस बार की महफिल में हुई बातों को विस्तार पूर्वक लिखने का बहुत मन था मेरा। लेकिन कतिपय व्यस्तता के कारण बस मन मसोस कर रह जाना पड़ रहा है। आप अंदाज़ा लगा लीजिए कि हम मिल बैठे थे 2 नवम्बर को और पोस्ट आ रही है आज 10 नवम्बर को!


ललित शर्मा जी को जब लगातार फोन आने शुरू हुए तो उन्होंने इज़ाज़त चाही हम सबसे। उन्हें जाना था रायपुर-धमतरी मार्ग पर अभनपुर्। हमेशा की तरह चलते चलते एक सामूहिक फोटो भी लिया गया। ज़ल्द ही पुन: मिल बैठने के निश्चय के साथ हमने भी रवानगी ली।

आप कब आ रहे हैं, भिलाई?

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Thursday 5 November 2009

इग्नू ऑनलाईन परीक्षा पर सायबर हमला!? : हम आत्मनिर्भर कब होंगे?

वैसे तो अपने देश में इतना कुछ होता रहता है कि अब अकेले, सिवाय कसमसाने के कुछ किया नहीं जा सकता। फिर भी कभी कभी कोई ऐसी खबर दिख जाती है कि मन उद्देलित हो उठता है। अजीब सा आक्रोश हो आता है। कल ही प्रशांत की एक पोस्ट में भी उनकी भावनाएँ पढ़ीं कि मेरे कुछ-कहने सुनने से उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला है.. कभी-कभी ... मन ही मन एक तरह का विद्रोह इन सबके खिलाफ पनप रहा है?

हुया यह कि कुछ देर पहले एक खबर पढ़ी कि इंदिरा गाँधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) की 31 अक्टूबर को इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिला के लिए ली जा रही ऑनलाइन परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही ठप्प हो गई थी। इंजीनियरिंग की इस प्रवेश परीक्षा में लगभग 9,350 छात्र थे। जिस पंक्ति ने मुझे उद्देलित किया वह थी कि देश के 18 लाख छात्रों को दूरस्थ शिक्षा देने वाला यह विश्वविद्यालय याहू के सर्वर का इस्तेमाल किया करता है। अब ऑनलाईन परीक्षा के दौरान सम्पर्क टूट जाने के संबंध में याहू से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।

बेशक मुझे इस संबंध में बेहतर तकनीकी ज्ञान नहीं है किन्तु एक सामान्य भारतीय नागरिक के रूप में जब मेरे कान पक चुके हों यह सुन सुन कर कि आईटी मामलों में भारत, भारत की मानव शक्ति, विश्व में अपने परचम फहरा रही है, तो एक सीधा सा प्रश्न यह आता है मन में कि हम आत्मनिर्भर क्यों नहीं हो सकते? क्या, कुछ घट जाने की प्रतीक्षा की जाती है ऐसी पहल के लिए? आज जब विभिन्न शहरों में फैली छोटी छोटी संस्थाएँ भी अपने खुद के सर्वर रखती हैं तो परीक्षा जैसे गोपनीय मामलों में भी विदेशी सर्वरों पर निर्भरता क्यों है?

प्रवेश परीक्षा में भाग लेने वाले छात्रों का कहना है कि मात्र 9350 उम्मीदवारों के लिए इग्नू का यह प्रयोग असफल रहा है तो यह निकम्मापन ही है।

विश्वविद्यालय प्रशासन हैरान है कि 9350 उम्मीदवारों के लिए रखे गए इस टेस्ट पर एक लाख से अधिक हिट्स कैसे आ गईं।

हालांकि इस घटना के पीछे हैंकिंग या भीतराघात की संभावना से इग्नू इंकार कर रहा है फिर भी यह है तो गंभीर मसला। इंडियन एक्सप्रेस समूह के फाईनेंशियल एक्सप्रेस ने इसे पिछले दिनों हुए फेसबुक व ट्विटर जैसा एक सायबर हमला करार दिया है। साथ ही यह अपुष्ट खबरें भी तैर रहीं कि यह विरोधियों का काम था।

मैं विचलित हूँ कि सब कुछ होते हुए भी हम आत्मनिर्भर कब होंगे?

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