दुनिया के मेले में तलाशिये

Sunday 13 December 2009

भिलाई में हुई ब्लॉगर चिन्तन बैठक के आरंभिक दो निर्णयों की घोषणा

आज से ठीक एक सप्ताह पहले, स्थानीय हिन्दी ब्लॉगरों की एक आकस्मिक बैठक भिलाई-दुर्ग में हुई थी, जिसे बाद में चिंतन बैठक का नाम दिया गया। पूर्वनियोजित बैठक न होने के कारण कई ब्लॉगरों को सूचना नहीं मिल पाई थी। मैराथन बैठक कही जा सकने वाली इस बैठक के दौरान, कई मह्त्वपूर्ण सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं। जिनमें से एक का संकेत राजकुमार ग्वालानी अपनी पोस्ट में दे चुके हैं। लिए गए निर्णयों पर बैठक में शामिल न हो पाने वाले, ज्ञात सक्रिय ब्लॉगर साथियों की भी सहमति ले ली गई है।
पहला महत्वपूर्ण निर्णय है, छत्तीसगढ़ के हिन्दी ब्लॉगरों की एसोसिएशन बनाए जाने का। इस संबंध में की जाने वाली वैधानिक प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। इस संस्था के बैनर तले सदस्यों की हितों की रक्षा व सहयोग के अलावा,


इंटरनेट व संचार सूचना माध्‍यमों में:
  • हिन्‍दी एवं छत्‍तीसगढ़ी के उन्‍नयन हेतु लेखन को प्रोत्‍साहन,
  • क्षेत्रीय साहित्‍य, संस्‍कृति व परंपराओं के संरक्षण व संवर्धन हेतु कार्य,
  • हिन्‍दी के प्रचार-प्रसार हेतु कार्य,
  • शिक्षण-प्रशिक्षण हेतु कार्य,
  • कम्‍प्‍यूटर प्रोग्रामों व वेब साईट्स आदि का निर्माण,
  • अन्‍य माध्‍यमों सहित जन शिक्षण के द्वारा सामाजिक विकास हेतु कार्य,
  • शासन की हिन्दी प्रोत्साहन योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना,
  • हिन्‍दी भाषा एवं छत्‍तीसगढ़ी भाषा के उन्‍नयन के लिए सेमीनार, वर्कशाप आदि प्रचार-प्रसार माध्‍यमों का निरंतर आयोजन
शामिल किए जाने की योजना है।

इस छत्तीसगढ़ हिन्दी ब्लॉगर एसोसिएशन के लिए सुझाव , अपेक्षायें, प्रतिक्रियायें आदि का cghbar@gmail.com पर स्वागत है।

दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय, प्रारम्भिक तौर पर देवनागरी लिपि में लिखे गए ब्लॉग्स की चर्चा का वेबसाईट आधारित मंच बनाया जाना था। जिसमें सदस्य चर्चाकारों का मूलत: मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ से संबंधित होना, प्राथमिक तौर पर, बैठक में उपस्थित ब्लॉगरों द्वारा स्वीकार किया गया। इस चर्चा मंच को आकार दिया जाना प्रारम्भ हो गया है। एक डोमेन www.chitthacharcha.com का पंजीयन करवा कर, इस पर कार्य शुरू किया जा चुका है, जिसके मकर संक्रांति (14 जनवरी 2010) तक पूर्ण होने की संभावना है। तत्संबंध में आप अपने सुझाव , अपेक्षायें, प्रतिक्रियायें आदि suggest@chitthacharcha.com या chitthacharcha@gmail.com पर भेज सकते हैं। कालांतर में इस चिट्ठाचर्चा वेबसाईट पर अन्य भारतीय भाषायों को भी स्थान दिया जाएगा।

इस चर्चा मंच की दो विशिष्ठ बातें भी बैठक में सैद्धांतिक रूप से तय हुईं कि इसमें, हिन्दी ब्लॉगिंग से जुड़े चर्चाकारों के साथ-साथ समाज के अन्य क्षेत्रों से, इंटरनेट से परिचित ऐसे व्यक्ति भी अपना अभिमत दे पाएँ, जो भले ही हिन्दी ब्लॉग लेखन न करते हों, लेकिन नज़र जरूर रखते हों हिन्दी ब्लॉगों पर। ऐसे व्यक्तियों के दृटिकोण से भी हिन्दी ब्लॉग्स को देखा जाना एक स्वस्थ परम्परा होगी। इसी कड़ी में, चर्चाकारों को, अगली किसी बैठक में तय होने वाले निर्दिष्ट बिन्दुओं के मानदंड पर, समानुपाती मानदेय दिए जाने के विचार को भी सहर्ष सहमति दी गई।


सम्प्रति, इन दो महत्वपूर्ण निर्णयों का, मूर्त रूप लिए जाने की प्रकिया शुरू हो जाने पर, खुलासा किया जा रहा है। इसके अलावा और भी कई निर्णय लिए गए हैं। जिनमें से एक निर्णय की सूचना अब, अगले रविवार को की जाएगी। हम उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसे ठोस परिणामों से हिन्दी ब्लॉगिंग, आप जैसे शुभचिंतकों के स्नेह से प्रगति की सीढ़ियाँ चढ़ते रहेगी।

इन दो, कार्यरूप में परिणित होने जा रहे, निर्णयों पर आपका क्या कहना है?

Read more...

Friday 4 December 2009

मेरी दिल्ली यात्रा: अजय झा परिवार, वापस भिलाई आने का दिन, फिर उनका ब्लॉगिंग को अलविदा कहना!!

अजय जी के साथ तकनीकी जानकारियाँ साझा करते-करते 17 तारीख की सुबह ढ़ाई बज गए तो हम अगले दिन का कार्यक्रम बनाते बिस्तर पर जा पहुँचे। सुबह नींद देर से खुली। बुआ जी पिछले दिन फोन कर दिल्ली वापस आ जाने की बात बता चुकी थी तो उनसे मिलना ज़रूरी हो गया था। बलबीर नगर के लिए वर्षों बाद शाहदरा पहुँच कर लोनी रोड पर घर तलाशने में मुझे कुछ संशय सा था पुराने सीमाचिन्ह गायब होने के बावज़ूद मात्र अंदाज़ से ही ठीक घर के सामने ही आटो रिक्शा रूकवाने में कामयाब रहा।

दोपहर के भोजन के बीच पारिवारिक बातों के बाद बुआ जी के घर से, अजय झा के निवास पर लौटा तो अजय जी ने सलाह दी कि ट्रेन के समय से कम से कम 2 घंटे पहले ही घर से चल पड़ना चाहिए। ट्रैफिक जाम का कोई भरोसा नहीं। बात सही भी थी। अब तो लगता है कि यह समस्या लगभग हर बड़े-छोटे शहर में आम सी हो गई है और लोग आदी भी हो गए हैं।
अजय जी के परिवार के साथ बिताए यह 4 दिन कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला। श्रीमती झा तो खुश थीं मेरे जैसा एक भाई मिल जाने से। उनकी प्यारी सी बेटी बुलबुल और उसके भाई आयुश की धमाचौकड़ी से सारा घर गुंजायमान रहता था। हम जब अजय जी के लैपटॉप पर झुके किसी विषय पर बातें करते रहते थे तो बुलबुल की जैसे यह जिज्ञासा रहती थी कि आखिर इसमें है क्या?

रवाना होने से पहले इस खुशहाल परिवार की खुशी को हमारे कैमरे ने कैद किया। अजय जी कुछ भावुक से हो गए थे। उनसे जब रहा नहीं गया तो वे बोल ही पड़े कि आप पहुँचिए भिलाई, मैं भी आता हूँ अगले महीने।
मैं तो पहुँच गया भिलाई। एक लम्बी चौड़ी पोस्ट भी लिख ली थी, दिल्ली के अंतिम दिन की। लेकिन ताज़ा घटनाक्रम में एक दिन सुबह सुबह जब मिथिलेश दुबे की पोस्ट से पता चला कि अजय झा ब्लॉगिंग को अलविदा कह रहे हैं तो थोड़ी हैरानी हुई। मुझे कोई एसएमएस भी नहीं मिला था। माथा ठनका कि रात को तो सब ठीक था, एकाएक क्या हुया! अजय जी को फोन लगाया तो मोबाईल बंद! उनकी श्रीमती जी के मोबाईल पर सम्पर्क किया गया तो पता चला कि अजय जी के मोबाईल की बैटरी खराब है। बात करवाने को कहा तो बताया गया कि कल रात एकाएक नेट कनेक्शन बंद हो गया था तो उसे 'धमकाने' गए हुए हैं। अजय जी के वापस आने पर बात हुई तो मैंने बताया कि क्या अफवाह फैली हुई है उनके बारे में।

अजय भी भौंचक्के रह गए। उन्होंने साफ इंकार कर दिया कि ऐसा कोई मैसेज भेजा गया है। मैंने जब जोर दे कर सारी बात बताई तो उन्होंने अपना मोबाईल, देर शाम नई बैटरी लगा कर, खंगाला। पता चला कि उन्होंने कल रात एकाएक नेट बंद हो जाने पर उस समय चैट पर गूफ़्तगू कर रहे लोगों के मोबाईल पर एक मैसेज भेजा था कि blogging ko aj vida kaha, aapke sneh ke liye shukriya संयोगवश वह मैसेज एक एसएमएस ग्रुप को भी चले गया। उस ग्रुप में जिन लोगों के नम्बर थे, उन्होंने भी उस मैसेज को पढ़ लिया इस बीच गड़बड़ यह हो चुकी थी कि मैसेज लिखते हुए अजय जी से j के बदले l (जे के बदले एल) टाईप हो गया था। साथियों के मोबाईल पर संदेश गया blogging ko alvida kaha,aapke sneh ke liye shukriya ! मतलब कि करेला और नीम चढ़ा! मैसेज भी गलत टाइप हो गया और अनचाहे साथियों के पास भी पहुँच गया!!

परिवार में वैवाहिक कार्यक्रम के सिलसिले में देर शाम घर लौटे अजय जी को तो जैसे साँप सूँघ गया हो। ब्लॉगिंग से अलविदा!? मैंने ऐसा तो नहीं कहा था!! मैंने हँसते हुए उनसे कहा कि लोग तो पोस्ट और टिप्पणी लिख मौज लेते हैं आपने तो एसएमएस भेज कर मौज ले ली। अब क्या किया जाए वाले भाव में उन्होंने सलाह मांगी तो झट से एक पोस्ट लिख कर स्थिति बताने को कह दिया हमने। अजय ने बड़े निराशा वाले स्वर में बताया कि केबल वाला एक दो दिन लगाएगा नई वायर डालने में, तब कहीं जा कर इंटरनेट चालू हो पाएगा और कैफ़े जाने का अब मन नहीं करता।

तब तक खुशदीप जी की पोस्ट भी आ चुकी थी। मुझे शरारत सूझी। मैंने कहा कि अब आप तो बस मौज लो। यही देखिए कि आपके इस गलती वाले संदेश की प्रतिकिया क्या होती है। कुछ तो लोग कहेंगे ही। कौन कितना शुभचिंतक है पता तो चले।

लेकिन हद तो तब हो गई जब उनकी इस कथित ब्लॉगिंग से अलविदा की वज़ह मुझे बताया जाने लगा कान के कच्चे कान के पूरे एक ब्लॉगर ने फुरसत पा कर मौज लेते हुए अजय जी को कह दिया कि तुम्हारी ब्लॉगिंग तो बंद होनी ही थी, एक ब्लॉगर को घर पर ठहराने का यही नतीजा होता है। पिछली बार दिनेशराय द्विवेदी, अरूण अरोरा के घर रूके थे तो उनकी ब्लॉगिंग बंद हो गई, ब्लॉग बंद हो गया। अब तुम्हारे साथ भी यही हुया!

उद्देलित अजय जी को शांत करते हुए मैंने हंसते यहीं किसी ब्लॉग में लिखी हुई लाईनें दोहरा दीं कि जिसको जितनी अकल होती है, वह वैसी ही बात करता है और जो जैसा होता है वैसा ही दूसरे के बारे में सोचता है!

कल शाम से अजय झा के घर पर नई केबल डाल कर इंटरनेट चालू कर दिया गया है। लेकिन अब अजय का मन खट्टा हो गया है। मेरा ख्याल है कि उन्हें इस मनस्थिति से उबर कर ब्लॉगिंग में पुन: हम सब शुभचिंतकों का साथ निभाना चाहिए। खुशनुमा ब्लॉगिंग के लिए मेरी शुभकामनाएँ उनके साथ हैं।

आपका क्या कहना है इस बारे में?











ऐसी ही नयी पोस्ट अपने ईमेल में प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें

Read more...

About This Blog

तलाश जारी रखिये

About This Blog

ब्लॉगरों की बातें

  © Free Blogger Templates Spain by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP